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माँ लक्ष्मी

माँ लक्ष्मी पूजा

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

दिवाली की लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए सब कुछ एक जगह: सामग्री की चेकलिस्ट, क्रम से पूजा विधि, दिवाली के पाँच दिन और आरती।

पूजा से पहले

  • दिवाली से पहले पूरा घर साफ़ करें — कहा जाता है कि माँ लक्ष्मी स्वच्छ, उजले घर में आती हैं। द्वार पर रंगोली, तोरण और दीये सजाएँ।
  • स्नान करके साफ़, हो सके तो नए वस्त्र पहनें। चौकी ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण में या इस तरह रखें कि आप पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
  • चौकी पर कपड़ा बिछाएँ। (आपके देखने से) दाईं ओर गणेश जी और बाईं ओर माँ लक्ष्मी, दोनों का मुख पूर्व की ओर। दाईं ओर कलश और सामने सिक्कों/गहनों के लिए चावल की छोटी ढेरी रखें।
  • सारी सामग्री पास रखें। पूजा शाम को (प्रदोष काल में) लक्ष्मी पूजा मुहूर्त में होती है — सही समय पंचांग में देखें।

पूजा विधि — क्रम से

  1. 1पवित्रीकरण और आचमन

    फूल से अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर जल छिड़कते हुए मंत्र बोलें; फिर तीन बार आचमन करें।

    मंत्र
    ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
    यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
  2. 2मुख्य दीपक

    देवताओं के दाईं ओर बड़ा घी का दीपक जलाएँ; यह पूरी पूजा में जलता रहे (कई लोग इसे रात भर जलाए रखते हैं)।

    मंत्र
    शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसम्पदः।
    शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
  3. 3संकल्प

    दाएँ हाथ में जल, अक्षत, फूल और सिक्का लें; तिथि, स्थान, अपना नाम-गोत्र और उद्देश्य ("माँ लक्ष्मी की कृपा, परिवार की समृद्धि और कल्याण के लिए") बोलें, फिर जल छोड़ दें।

    मंत्र
    ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। अद्य कार्तिक मासे कृष्ण पक्षे अमावस्यायां तिथौ
    ...... गोत्रोत्पन्नः ...... नामाहं
    श्रीमहालक्ष्मी-गणेश पूजनं करिष्ये॥
  4. 4गणेश पूजन (सबसे पहले)

    गणेश जी की मूर्ति को जल से स्नान कराएँ (तस्वीर हो तो छींटे दें), रोली-हल्दी का तिलक और अक्षत लगाएँ, दूर्वा, फूल और मोदक या लड्डू चढ़ाएँ। निर्विघ्न पूजा की प्रार्थना करें।

    मंत्र
    वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
    निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
    ॐ गं गणपतये नमः।
  5. 5कलश एवं वरुण पूजन

    कलश में जल भरें, सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें, ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें, मौली बाँधें और रोली से स्वस्तिक बनाएँ। उस पर रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएँ।

    मंत्र
    ॐ वरुणाय नमः। कलशं पूजयामि।
  6. 6माँ लक्ष्मी का ध्यान और आवाहन

    हाथ जोड़कर माँ लक्ष्मी का ध्यान करें — कमल पर विराजमान, स्वर्ण वर्ण, धन की वर्षा करती हुईं, दोनों ओर गज। फिर अक्षत और फूल लेकर उन्हें मूर्ति में पधारने का आवाहन करें।

    मंत्र
    ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद
    ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
    आवाहयामि, स्थापयामि।
  7. 7षोडशोपचार पूजन

    हर वस्तु क्रम से चढ़ाएँ, और बोलें "ॐ महालक्ष्म्यै नमः, [उपचार] समर्पयामि":

    आसन → पाद्य → अर्घ्य → आचमन → स्नान (पंचामृत, फिर जल) → वस्त्र (चुनरी) → आभूषण (गहने/सिक्के) → गंध (चंदन, रोली, हल्दी) → अक्षत → पुष्प (कमल, लाल फूल, माला) → धूप → दीप → नैवेद्य (खील-बताशे, मिठाई, फल; फिर जल) → ताम्बूल → दक्षिणा → प्रदक्षिणा और नमस्कार

    मंत्र
    ॐ महालक्ष्म्यै नमः, [उपचार] समर्पयामि।
  8. 8कुबेर पूजन और बही-खाता पूजन

    तिजोरी / लॉकर की चाबियाँ, सिक्के और गहने माँ के सामने चावल की ढेरी पर रखें; तिलक-अक्षत लगाएँ और धन के रक्षक कुबेर से प्रार्थना करें।

    दुकानदार और व्यापारी: नए बही-खाते पर रोली से स्वस्तिक और "शुभ लाभ" लिखें, अक्षत और फूल चढ़ाएँ, और माँ के आशीर्वाद से नए वर्ष का हिसाब शुरू करें।

    मंत्र
    ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
    धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
  9. 9पाठ और जाप

    हो सके तो श्री सूक्त या लक्ष्मी चालीसा / अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम) का पाठ करें; नहीं तो माला पर लक्ष्मी मंत्र 108 बार जपें।

    मंत्र
    ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
  10. 10आरती

    पहले गणेश जी की, फिर माँ लक्ष्मी की आरती करें — "आरती" टैब देखें।

  11. 11दीपदान

    मुख्य पूजा-दीपक से दीये जलाकर द्वार, हर कमरे, रसोई, जल-स्थान, तुलसी और छत पर रखें — कोई कोना अंधेरा न रहे। माँ लक्ष्मी के आगमन के लिए एक दीया दहलीज़ पर रखें।

    मंत्र
    दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।
    दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
  12. 12क्षमा प्रार्थना

    हाथ जोड़कर पूजा में हुई किसी भूल के लिए माँ से क्षमा माँगें।

    मंत्र
    आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
    पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥
  13. 13प्रसाद

    खील-बताशे और मिठाई प्रसाद रूप में बाँटें। पूजा के सिक्के/गहने अगली सुबह तिजोरी में रखें — वे वर्ष भर के लिए आशीर्वादित माने जाते हैं।

यह दिवाली की आम घरेलू पूजा विधि है; क्रम और कुछ मंत्र क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकते हैं। मंत्र पारंपरिक रूप में दिए गए हैं — इन्हें एक बार किसी विश्वसनीय पुस्तक (जैसे गीता प्रेस) या पारिवारिक पंडित जी से मिला लेना अच्छा है।

आरती कैसे करें

  1. आरती की थाली सजाएँ: घी का दीपक या कपूर, रोली, अक्षत, फूल और घंटी।
  2. पहले गणेश जी की, फिर माँ लक्ष्मी की आरती करें। बाएँ हाथ से घंटी बजाएँ और दाएँ हाथ से थाली घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ।
  3. प्रचलित तरीक़ा: चार बार चरणों में, दो बार नाभि के पास, एक बार मुख के सामने, फिर सात बार पूरे स्वरूप पर।
  4. आरती के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाएँ और सबको आरती दें।

आरती — ॐ जय लक्ष्मी माता

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

जिस घर में तुम रहतीं, तहँ सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे ही आता॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

धूप-दीप-पुष्प चढ़ाकर, भक्त आरती गाते।
मनवांछित फल पाते, दुख-दरिद्र मिटाते॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता। 🙏

दिवाली पाँच दिनों का पर्व है: धनतेरस से भाई दूज तक। लक्ष्मी पूजा तीसरे दिन, अमावस्या को होती है।

इस साल की दिवाली की तारीखें देखी जा रही हैं…
  1. 1धनतेरस

    कोई नई वस्तु (बर्तन, सोना/चांदी) खरीदें और शाम को दहलीज़ पर यमराज के लिए दीया जलाएँ। भगवान धन्वंतरि की पूजा भी होती है।

  2. 2नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

    सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान (तेल मालिश); शाम को दीये। कई घरों में हनुमान जी की पूजा भी होती है।

  3. 3दिवाली — लक्ष्मी पूजा

    मुख्य दिन: शाम को (प्रदोष काल, हो सके तो वृषभ के स्थिर लग्न में) लक्ष्मी-गणेश पूजा — इसी पेज की विधि। पूरे घर में दीये।

  4. 4गोवर्धन पूजा / अन्नकूट

    गोबर से बने गोवर्धन की पूजा; श्री कृष्ण को अनेक व्यंजनों का अन्नकूट भोग।

  5. 5भाई दूज

    बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं; भाई उपहार देते हैं।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

पूजा शाम को प्रदोष काल में (सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक) और परंपरा से स्थिर लग्न में — वृषभ लग्न, जो दिवाली की शाम उदय होता है — की जाती है, ताकि माँ लक्ष्मी "स्थिर" रहें। उस दिन का सही समय जानने के लिए उस तारीख का संपूर्ण पंचांग खोलें: सूर्यास्त देखें, और राहु काल से बचें।

तारीखें नई दिल्ली (सूर्योदय / प्रदोष आधारित) की हैं और कुछ क्षेत्रों या पंचांगों में एक दिन का अंतर हो सकता है।

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पूजा सामग्री सूची

मूर्ति व आसन (0/6)

कलश (0/5)

पूजा की सामग्री (0/19)

फूल (0/4)

माँ लक्ष्मी के लिए विशेष (0/6)

भोग व प्रसाद (0/5)

यह आम तौर पर प्रयुक्त सूची है; सामग्री क्षेत्र और पारिवारिक परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है — जहाँ अंतर हो, अपनी परंपरा मानें।