
हनुमान पूजा के लिए सब कुछ एक जगह — मंगलवार / शनिवार, हनुमान जयंती, चोला या नित्य पूजा के लिए: सामग्री की चेकलिस्ट, क्रम से पूजा विधि, व्रत नियम और आरती। हनुमान चालीसा अलग पेज पर है।
फूल से अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर जल छिड़कते हुए मंत्र बोलें; फिर तीन बार आचमन करें।
हर पूजा गणेश जी से शुरू होती है: मंत्र के साथ फूल और अक्षत अर्पित करें।
दाएँ हाथ में जल, अक्षत और फूल लें; अपना नाम, गोत्र, स्थान, तिथि और मनोकामना (साहस, भय और विघ्न से रक्षा, आरोग्य, शनि/मंगल दोष शांति, जो व्रत रख रहे हों) बोलें — फिर जल छोड़ दें।
हनुमान जी सबसे पहले श्री राम के नाम से प्रसन्न होते हैं: हनुमान जी की पूजा से पहले श्री राम-सीता को फूल अर्पित करें (या हाथ जोड़कर नाम लें)।
हाथ जोड़कर हनुमान जी का ध्यान करें — पर्वत जैसा शरीर, कंचन-लाल वर्ण, हाथ में गदा, हृदय में राम-नाम — और फूल अर्पित करें।
धातु की मूर्ति हो तो जल, फिर पंचामृत, फिर जल से स्नान कराकर पोंछें। तस्वीर या सिंदूर चढ़ी मूर्ति पर फूल से जल की कुछ बूँदें छिड़कें।
सिंदूर-चमेली का लेप मूर्ति पर चरणों से ऊपर की ओर लगाएँ (चोला), या मस्तक और चरणों पर सिंदूर का तिलक करें। फिर लाल लंगोट/वस्त्र, जनेऊ और वर्क हो तो अर्पित करें।
सिंदूर क्यों: सीता जी ने कहा कि सिंदूर श्री राम की लंबी आयु के लिए है, तो हनुमान जी ने पूरा शरीर सिंदूर से रँग लिया — इसलिए सिंदूर उनका सबसे प्रिय अर्पण है।
चंदन तिलक, अक्षत, लाल फूल, माला और तुलसी दल अर्पित करें; फिर धूप और दीप (चमेली के तेल का दीपक पारंपरिक है)।
लड्डू, केले, गुड़-चना और नारियल का भोग लगाएँ, थाली के चारों ओर जल घुमाएँ, फिर पान का बीड़ा और आचमन के लिए जल अर्पित करें।
हनुमान चालीसा का पाठ करें (संकल्प के अनुसार 1, 7, 11 या 108 बार), और समय हो तो बजरंग बाण या सुंदरकांड। पूरी चालीसा अर्थ सहित इसी ऐप के हनुमान चालीसा पेज पर है।
घी के दीपक या कपूर से "आरती कीजै हनुमान लला की" गाते हुए आरती करें — बोल आरती टैब में हैं।
चौकी की (या अपने स्थान पर) तीन परिक्रमा करें, पुष्पांजलि मंत्र के साथ फूल/अक्षत अर्पित कर प्रणाम करें — पुरुष परंपरा से साष्टांग प्रणाम।
पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँगें और प्रसाद बाँटें। हनुमान जी के चरणों का सिंदूर आशीर्वाद के रूप में माथे पर लगाया जाता है।
सिंदूर और चमेली का तेल: सबसे प्रिय अर्पण; मंगलवार/शनिवार को चमेली के तेल में सिंदूर का चोला। दीपक भी चमेली के तेल का जलाया जाता है।
पहले राम-नाम: हनुमान जी राम-भक्त हैं — उनसे पहले श्री राम का स्मरण होता है, और तुलसी (विष्णु/राम को प्रिय) चढ़ाई जाती है।
ब्रह्मचर्य और सात्विक भोजन: पूजा/व्रत के दिन: मांस, मदिरा, प्याज़-लहसुन नहीं; पूजा शुद्ध तन-मन से होती है।
शनि और मंगल: शनिवार को हनुमान पूजा शनि (साढ़ेसाती, ढैया) का और मंगलवार को मंगल दोष का पारंपरिक उपाय है — अपनी कुंडली रिपोर्ट के उपाय देखें।
यह आम घरेलू पूजा विधि है; क्रम और कुछ मंत्र क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकते हैं। मंत्र पारंपरिक रूप में दिए गए हैं — इन्हें एक बार किसी विश्वसनीय पुस्तक (जैसे गीता प्रेस) या पारिवारिक पंडित जी से मिला लेना अच्छा है।
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर काँपे।
रोग दोष जाके निकट न झाँके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज सँवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि संजीवन प्राण उबारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
पैठि पाताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाएँ भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
सुर नर मुनि आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जो हनुमानजी की आरती गावे।
बसि बैकुंठ परम पद पावे॥
लंक विध्वंस किए रघुराई।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा (मार्च/अप्रैल) को होती है। हर सप्ताह मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के दिन हैं।
अगला मंगलवार: मंगलवार, 6 अक्टूबर
अगला शनिवार: शनिवार, 3 अक्टूबर
तारीखें नई दिल्ली की हैं और कुछ क्षेत्रों या पंचांगों में एक दिन का अंतर हो सकता है।
यह आम तौर पर प्रयुक्त सूची है; सामग्री क्षेत्र और पारिवारिक परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है — जहाँ अंतर हो, अपनी परंपरा मानें। नित्य पूजा के लिए सिंदूर, दीपक, फूल और चालीसा पर्याप्त हैं।