
गणेश पूजा के लिए सब कुछ एक जगह — गणेश चतुर्थी (स्थापना से विसर्जन तक) और नित्य या संकष्टी पूजा के लिए: सामग्री की चेकलिस्ट, क्रम से पूजा विधि, गणेशोत्सव के दिन और आरती।
फूल से अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर जल छिड़कते हुए मंत्र बोलें; फिर तीन बार आचमन करें।
मूर्ति की दाईं ओर घी का दीपक और धूप/अगरबत्ती जलाएँ; दीपक पूरी पूजा में जलता रहे।
दाएँ हाथ में जल, अक्षत, फूल और सिक्का लें; अपना नाम, गोत्र, स्थान और तिथि बोलकर मनोकामना कहें (जैसे विघ्न-निवारण, नए कार्य में सफलता) — फिर जल थाली में छोड़ दें।
चौकी पर अक्षत की ढेरी बनाकर उस पर मूर्ति रखें। फूल (या दाएँ हाथ) से मूर्ति के हृदय को स्पर्श करते हुए प्राण-प्रतिष्ठा मंत्र से गणेश जी का आवाहन करें।
रोज़ की पूजा में स्थिर मूर्ति/तस्वीर हो तो यह चरण केवल हाथ जोड़कर आवाहन है।
कलश में जल भरें, सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें, गले में मौली बाँधें, आम के पत्ते लगाकर ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें। वरुण देव और पवित्र नदियों का आवाहन करें।
हाथ जोड़कर गणेश जी का ध्यान करें और ध्यान श्लोक के साथ फूल अर्पित करें।
धातु की मूर्ति हो तो जल, फिर पंचामृत, फिर जल से स्नान कराकर साफ़ कपड़े से पोंछें। मिट्टी की मूर्ति को स्नान नहीं कराते — फूल से जल की कुछ बूँदें छिड़कें।
वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें, फिर चंदन और सिंदूर का तिलक, अक्षत, माला और लाल फूल चढ़ाएँ।
दूर्वा की 21 जोड़ियाँ एक-एक करके चरणों में चढ़ाएँ, हर बार गणेश जी का एक नाम लेते हुए — या सबके साथ नीचे का दूर्वा मंत्र बोलें।
धूप और दीप दिखाएँ, फिर पान-सुपारी, लौंग और इलायची अर्पित करें।
मोदक, लड्डू, फल और नारियल का भोग लगाएँ, थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाएँ। फिर आचमन के लिए जल अर्पित करें।
गणेश मूल मंत्र का 108 (या 11 / 21) बार जाप करें, या गणेश अथर्वशीर्ष / संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें।
घी के दीपक या कपूर से "जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा" गाते हुए आरती करें — बोल आरती टैब में हैं।
चौकी की (या अपने स्थान पर) तीन परिक्रमा करें, फिर पुष्पांजलि मंत्र के साथ फूल/अक्षत अर्पित कर प्रणाम करें।
पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँगें, फिर प्रसाद बाँटें। गणेश चतुर्थी पर जितने दिन मूर्ति रहे, सुबह-शाम आरती करें; विसर्जन के लिए गणेशोत्सव टैब देखें।
दूर्वा: 3 या 5 पत्तियों की जोड़ी में 21 दूर्वा चढ़ाएँ — गणेश जी का सबसे प्रिय अर्पण।
तुलसी नहीं चढ़ती: गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती (कुछ परंपराओं में केवल गणेश चतुर्थी को अपवाद); केतकी के फूल भी नहीं।
सिंदूर और मोदक: गणेश जी को सिंदूर (केवल चंदन नहीं) और भोग में मोदक / लड्डू चढ़ाए जाते हैं।
सबसे पहले गणेश: हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी पूजे जाते हैं — इसलिए यह विधि किसी भी पूजा का आरंभ भी है।
यह आम घरेलू पूजा विधि है; क्रम और कुछ मंत्र क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकते हैं। मंत्र पारंपरिक रूप में दिए गए हैं — इन्हें एक बार किसी विश्वसनीय पुस्तक (जैसे गीता प्रेस) या पारिवारिक पंडित जी से मिला लेना अच्छा है।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
गणेशोत्सव गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) से अनंत चतुर्दशी तक — दस दिन। परिवार मूर्ति डेढ़, 5, 7 या पूरे 10 दिन रखते हैं।
मूर्ति घर लाकर मध्याह्न मुहूर्त में स्थापना करें (इसी पेज की विधि)। परंपरा से इस रात चंद्रमा नहीं देखा जाता।
कई परिवार डेढ़ दिन मूर्ति रखकर दूसरे दिन दोपहर की आरती के बाद विसर्जन करते हैं।
एक और प्रचलित विकल्प — पाँचवें दिन गणपति की विदाई।
कुछ परिवार और मंडल सातवें दिन विसर्जन करते हैं।
दसवाँ दिन: उत्तर-पूजा और आरती, फिर "गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या" के साथ मूर्ति का जल में विसर्जन। मिट्टी की मूर्ति और पर्यावरण-अनुकूल (टब / कृत्रिम तालाब) विसर्जन चुनें।
स्थापना मध्याह्न काल में होती है — सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच का लगभग मध्य भाग, जब गणेश जी का जन्म माना जाता है। उस दिन का सही समय जानने के लिए उस तारीख का संपूर्ण पंचांग खोलें (सूर्योदय/सूर्यास्त और अभिजित मुहूर्त) और राहु काल से बचें।
गणेशोत्सव के अलावा हर महीने संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण पक्ष चतुर्थी, व्रत चंद्रोदय के बाद खुलता है) और विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष, मध्याह्न पूजा) को गणेश जी की पूजा होती है। सप्ताह में बुधवार गणेश जी का दिन है।
तारीखें नई दिल्ली की हैं और कुछ क्षेत्रों या पंचांगों में एक दिन का अंतर हो सकता है।
यह आम तौर पर प्रयुक्त सूची है; सामग्री क्षेत्र और पारिवारिक परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है — जहाँ अंतर हो, अपनी परंपरा मानें। नित्य पूजा के लिए केवल पूजा सामग्री और भोग पर्याप्त हैं।